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स्वास्थ्य जानकारी

स्तनपान के लिए माँ को तैयार करना और कठिनाइयाँ:

गर्भवती माँ को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। किसी भी स्तन संबंधी मुद्दों जैसे कि पलटा हुआ निप्पल को गर्भावस्था के अंतिम तिमाही में ही हल करना चाहिए[cite: 3]। व्यक्तिगत रूप से या प्रसूति सुविधा द्वारा आयोजित समूहों में प्रसवपूर्व स्तनपान के परामर्श और फार्मूला फीडिंग / टॉप फीडिंग के नुकसान बताया जाना चाहिए[cite: 3]। मुख्य उद्देश्य गर्भवती माँ को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित करके आगे सफल स्तनपान कराना है[cite: 3]। स्तनपान में कुछ कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं:

Inverted Nipple

1. पलटा हुआ निप्पल

इसमें निप्पल आगे नहीं बढ़ता है[cite: 3]। पलटा हुआ निप्पल के साथ मां को सिरिंज विधि से मदद की जा सकती है[cite: 3]:

  • एक disposable syringe (10-20 मिलीलीटर) के नोजल छोर को काट दिया जाता है[cite: 3]।
  • काट कर, अंतपक्ष के माध्यम से पिस्टन को कटे हुए छोर से डाला जाता है[cite: 3]।
  • माँ को निप्पल के ऊपर सिरिंज के चिकने सिरे को लगाना चाहिए और धीरे से पिस्टन पर खींचना चाहिए और उसे एक मिनट तक रुकने देना चाहिए[cite: 3]।
  • निप्पल फिर सिरिंज में फैल जाएगा। मां को धीरे-धीरे खिचाव जारी रखना चाहिए। यह निप्पल को बाहर निकालने में मदद करता है[cite: 3]।
  • निप्पल वापस पलट सकता है लेकिन कुछ दिनों की अवधि में हर बार ऐसा करने से समस्या का समाधान हो जाता है[cite: 3]।
Sore Nipple

2. घाव/फटी हुई निप्पल

निप्पल को बार-बार साबुन और पानी से नहीं धोना चाहिए[cite: 3]। स्तनपान कराने वाली मां के लिए दिन में एक बार स्नान करना पर्याप्त है[cite: 3]। स्तन में बच्चे के अनुचित पकड़ से निप्पल में गिल्टी/फोड़ा हो जाता है[cite: 3]। निप्पल में गिल्टी/फोड़ा होने का सबसे आम कारण है, बच्चे को बोतल का दूध पिलाना। बच्चा बोतल के निप्पल को चूसता है जबकि स्तन को उचित ढंग से पकड़ना पड़ता है[cite: 3]। "निप्पल कन्फ्यूजन" के कारण बच्चा स्तन के निप्पल को जोर से चूसता है और निप्पल इस कारण कट जाता है, जिससे निप्पल में गिल्टी/फोड़ा होता है[cite: 3]। कैंडिडा संक्रमण होने से भी स्तन में फोड़ा होता है[cite: 3]।

उपचार: बोतल से दूध नहीं पिलाना, नहाते समय स्तन को साबुन से बार-बार नहीं धोना, सही स्थिति और सही तरीके से बच्चे को निप्पल से जोड़े रखना चाहिए[cite: 3]। हांइडमिल्क या क्रीम को एक फ़ीड के बाद निप्पल पर लगाया जा सकता है[cite: 3]। निप्पल को फ़ीड के बीच में हवा लगने तथा घाव भरने देना चाहिए[cite: 3]।

Engorgement of Breast

3. स्तन या छाती का भारी होना

प्रसव के दूसरे और तीसरे दिन के बाद स्तन के दूध का उत्पादन बढ़ जाता है[cite: 3]। यदि माँ बच्चे को देरी से दूध पिलाती है या नहीं पिलाती है, तो दूध जमा हो जाता है जिससे एल्वियोली की भण्डारण की क्षमता अधिक हो जाती है[cite: 3]। इसलिए स्तन सूजे हुए, कठोर, गर्म और दर्ददायक होते हैं[cite: 3]।

उपचार: प्रारंभिक और लगातार स्तनपान कराना, माँ द्वारा दूध को स्वयं निकालना, गर्म पानी से सेकना, अगर राहत न मिले तो दर्द निवारक दवा का सेवन करना[cite: 3]।

Breast Abscess

4. स्तनों में सूजन होना (Breast Abscess)

एक फटे हुए निप्पल के उपचार में देरी से स्तनों में संक्रमण हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप स्तन में सूजन हो सकता है[cite: 3]। स्तन सूजे हुए, लाल और दर्द भरा हो जाते हैं, जिससे मां को बुखार हो सकता है[cite: 3]।

उपचार: दर्द निवारक और एंटीबायोटिक्स, माँ द्वारा दूध को स्वयं निकालना, कभी-कभी इसे ब्लेड से चीरा मार के/ काट के पस को खाली करना पड़ता है[cite: 3]। स्तनपान हमेशा जारी रखा जाना चाहिए[cite: 3]।