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स्वास्थ्य जानकारी

गर्भावस्था के दौरान क्या देखभाल की जानी चाहिए?

विश्राम और नींद

गर्भवती महिलाएँ गर्भावस्था के दौरान अपनी सामान्य गतिविधियाँ कर सकती हैं, लेकिन केवल पहली तिमाही और अंतिम 4 सप्ताह में अत्यधिक और तनावपूर्ण काम से बचना चाहिए।

  • उन्हें आखरी 6 हफ्तों में 10 घंटे (रात में 8 घंटे और दोपहर में 2 घंटे) आराम करना चाहिए।
  • अंतिम तिमाही के दौरान, निम्न रक्तचाप से बचने के लिए माँ को पार्श्व मुद्रा (करवट लेकर) में लेटना चाहिए।
Pregnancy Care

व्यायाम

चिकित्सा या प्रसूति संबंधी जटिलताओं की अनुपस्थिति में, गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से मध्यम व्यायाम करना चाहिए।

  • सप्ताह के सभी दिनों में प्रति दिन 30 मिनट या अधिक से अधिक मध्यम व्यायाम की सलाह दी जाती है।
  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की विशिष्ट शारीरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, योग अभ्यास के विभिन्न प्रकारों के विशिष्ट योगविधि का उपयोग करना चाहिए।

नुकसान पहुँचाने वाले रसायन और विषाक्त पदार्थों से बचें

  • कीटनाशकों से दूर रहें।
  • फलों और सब्जियों पर छिड़कने वाले कीटनाशकों से छुटकारा पाने के लिए, कुछ समय के लिए काटने या छीलने से पहले उन्हें नमक पानी में भिगो दें और अच्छी तरह से धोएँ।
  • बंद कमरों में मच्छर भगाने वाली धूप का इस्तेमाल न करें।
  • इसकी जगह मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।

आंत की देखभाल

इस समय पर कब्ज़ आम होता हैँ।

  • मां को भरपूर मात्रा में तरल लेना चाहिए।
  • सब्जियां, दूध या रात में जरूरत पड़ने पर कब्ज़ की औषधि लेना चाहिए।

स्नान

उन्हें रोज नहाना चाहिएँ।

कपड़े

  • उन्हें ढीले और आरामदायक कपड़े पहनना चाहिए।
  • ऊँची एड़ी के जूते का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • किसी भी कसने वाली पेटी (बेल्ट) का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

मुंह की स्वच्छता

  • उचित दंत चिकित्सा और मुंह की स्वच्छता बनाए रखी जानी चाहिए।
  • किसी भी दंत समस्याओं का निवारण जैसे कि अर्क दांत के निष्कर्षण (दांत निकालना) या भरने की प्रक्रिया दूसरी तिमाही में किया जाना चाहिए।

स्तन की देखभाल

एक ठीक तरह से छाती पर बैठने वाली ब्रा गर्भावस्था के दौरान संलग्न (बढ़े हुए) स्तन को राहत दे सकती है।

यौनक्रिया

सामान्यतः यौनक्रिया गर्भावस्था के दौरान मना नहीं है। लेकिन, जिन महिलाओं में गर्भपात या समय के पहले प्रसव का खतरा हो, उन्हें यौनक्रिया से वर्जन (परहेज) करना चाहिए।

यात्रा

  • धक्का देने वाली (झटकेदार) यात्रा से बचना सबसे अच्छा है।
  • रेलवे का सफर बस से बेहतर है।
  • गर्भावधि उम्र के 36 सप्ताह तक ही हवाई यात्रा करना सुरक्षित है।
  • प्लेसेंटा प्रीविया, प्री-एक्लम्पसिया, गंभीर रक्त अल्पता (एनीमिया) और सिकल रोग के मामले में यात्रा से बचना सबसे अच्छा होता है। लंबे समय तक बैठने से खून जमने का जोखिम होगा।
  • सीट बेल्ट पेट के नीचे कमर पर होना चाहिए।

धूम्रपान, मदिरा और नशा सेवन

इन के कारण कम वजन के बच्चे, भ्रूण का विकृत होना, एकाएक शिशु मृत्यु (एस.आई.डी.एस.) और मृतजन्म होता है।

संक्रमण से अपने आप को दूर रखें

  • माँ को बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोना चाहिए।
  • विशेष रूप से खाना पकाने, खाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद हाथ धोना चाहिए।
  • बीमार लोगों से बचना चाहिए।

भावनात्मक स्वास्थ्य

किसी भी प्रकार का तनाव माँ में चिंता, उदासी, अकेलेपन का कारण बन सकता है। परिवार को घर का माहौल सकारात्मक और सुरक्षित बनाना चाहिए और घरेलू हिंसा नहीं होना चाहिए।

स्तनपान की तैयारी

माँ को शारीरिक और भावनात्मक रूप से स्तनपान कराने के लिए तैयार करना चाहिए। बच्चे के पैदा होने से पहले ही स्तन के अगले भाग (निप्पल) की किसी भी समस्या का प्रबंधन किया जाना चाहिए।

मातृ टीकाकरण क्या है?

मातृ टीकाकरण गर्भावस्था के दौरान दिया जाने वाला टीका है। यह गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण में न केवल माताओं को टीके से रोके जा सकने वाले रोगों से बचाने की अपार क्षमता है, बल्कि उनके भ्रूण और शिशु को भी सक्रिय बचपन के टीकाकरण के माध्यम से स्वयं सुरक्षा प्राप्त करने से पहले ही सुरक्षात्मक एंटीबॉडी के निष्क्रिय अधिग्रहण के माध्यम से सुरक्षित रखने की क्षमता है।

  • मातृ और नवजात टेटनस उन्मूलन की सफलता (टेटनस टीकाकरण)।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए अनुशंसित इन्फ्लूएंजा वैक्सीन।
  • पर्टुसिस (काली खांसी) युक्त टीके।
  • रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (आरएसवी) वैक्सीन।