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स्वास्थ्य जानकारी

कंगारू मदर केयर

हर साल वैश्विक स्तर पर जन्म लेने वाले 2 करोड़ कम वजन के शिशुओं में से लगभग 80 लाख भारत में जन्म लेते है। भारत में कुल नवजात शिशुओं की मृत्यु में से 80% से अधिक मृत्यु कम वजन के शिशुओं की होती है - 65% समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में और 19% गर्भकालीन उम्र के हिसाब से कम वजन वाले शिशुओं में, (Lawn Every Newborn Lancet Series 2014)। भारत में समय से पहले जन्म लेने वाले नवजात शिशु की संख्या सबसे अधिक है और इन की मृत्यु की अधिकतम संख्या भी भारत में ही है। भारत में कम वजन (लो बर्थ वेट) का अनुपात कुल जीवित जन्मों का लगभग 27% है।

कंगारू मदर केयर(के.एम.सी.):-

कंगारू मदर केयर (के.एम.सी.) कम वजन के शिशुओं के लिए देखभाल की एक सरल विधि है|जिसमें मां के साथ या अन्य देखभाल करनेवाला लंबे समय तक त्वचा से संपर्क में रखा जाता है| इसमें बार-बार स्तनपान करना भी आवश्यक होता है। कंगारू मदर केयर एक कम संसाधन, साक्ष्य आधारित, उच्च प्रभाव वाला और जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं के लिए प्रभावकारी देखभाल है, जो स्तनपान की तरह, नियमित देखभाल का हिस्सा होना चाहिए। के.एम.सी. <2000g ((Lawn et al, 2010) वजन वाले शिशुओं में होने वाली सभी मृत्यु में से आधे तक को रोक सकती है। जन्म के वक़्त, कम वजन के शिशुओं के लिए मानक देखभाल अभ्यास के रूप में विश्व स्वास्थ्य संगठन के.एम.सी. के उपयोग की वकालत करता है।

के.एम.सी. के घटक

कंगारू मदर केयर के निम्नलिखित घटक हैं:

  • हाथ धोना (PEDGEN टीम दृढ़ता से इसे एक घटक के रूप में मानती है क्योंकि संक्रमण के कारण एक तिहाई नवजात मृत्यु होती है)
  • माँ और बच्चे के बीच लगातार त्वचा से त्वचा का संपर्क
  • केवल स्तनपान
Origin of Kangaroo

के.एम.सी. कम वजन के शिशुओं के लिए है और यह एक निरंतर, लंबी अवधि के लिए त्वचा से त्वचा के संपर्क को दर्शाता है।

कंगारू ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला एक जानवर है। वह हमेशा समय से पहले बच्चे को जन्म देती है। समय से पहले जन्मा, बच्चा कंगारू अपनी मां की थैली में रहता है, जहां उसे गर्माहट और विशेष स्तनपान मिलता है, जब तक कि वह बाहर जीवित रहने के लिए पर्याप्त परिपक्व न हो जाए।

प्रक्रिया:-

<2,500 ग्राम से कम वजन के शिशुओं के लिए के.एम.सी. शुरू करें जितनी जल्दी हो सके।

के.एम.सी. की अवधि:-

  • प्रत्येक के.एम.सी. (कंगारू मदर केयर) सत्र में नवजात शिशु को कम से कम 1 घंटे तक रखना चाहिए ताकि बच्चे को बार-बार उठाने और रखने से होने वाली परेशानी से बचाया जा सके। के.एम.सी. में शिशु को केवल डायपर बदलने तथा चिकित्सीय परीक्षण के लिए ही बाहर निकालना चाहिए।
  • स्तनपान के.एम.सी. स्थिति में भी जारी रखा जा सकता है और सामान्यतः यह प्रत्येक 2 से 3 घंटे के अंतराल पर कराया जाता है।
  • के.एम.सी. स्थिति में शिशु को लेकर माँ विभिन्न गतिविधियाँ कर सकती है, जैसे चलना, खड़ा होना, बैठना अथवा अन्य कार्य करना। यदि माँ को कोई असुविधा न हो तो वह शिशु को कंगारू स्थिति में रखते हुए अर्ध-लेटे या अर्ध-बैठे हुए आरामदायक अवस्था में सो भी सकती है।
  • लघु अवधि (Short): प्रतिदिन 4 घंटे।
  • विस्तारित अवधि (Extended): प्रतिदिन 5 से 8 घंटे।
  • दीर्घ अवधि (Long): प्रतिदिन 9 से 12 घंटे।
  • निरंतर (Continuous): प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक।

के.एम.सी. के लाभ:-

के.एम.सी., गर्भाशय के वातावरण का अनुकरण करता है और शारीरिक स्थिरता की सुविधा देता है। यह विकास का सबसे समग्र रूप है जो की सहायक देखभाल प्रदान करने वाला मल्टीमॉडल उत्तेजना जो सभी छह इंद्रियां को सही तरीके से संतुष्ट करता है।

  • मृत्यु दर में कमी : कंगारू मदर केयर से नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आती है।
  • अल्पताप (हाइपोथर्मिया) में कमी : शिशु के शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने में सहायता मिलती है।
  • शारीरिक स्थिरता में सुधार : शिशु की हृदय गति, श्वसन दर तथा ऑक्सीजन स्तर अधिक स्थिर रहते हैं।
  • साँस रुकने और रोने में कमी : शिशु अधिक शांत रहता है तथा साँस रुकने की घटनाएँ कम होती हैं।
  • अस्पताल में संक्रमण का कम खतरा : अस्पताल में रहने से होने वाले संक्रमणों की संभावना कम हो जाती है।
  • नींद और विकास में सुधार : शिशु को बेहतर नींद मिलती है, जिससे उसके शारीरिक और मानसिक विकास में सहायता मिलती है।
  • स्तनपान में सुधार : माँ और शिशु के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होता है, जिससे स्तनपान अधिक प्रभावी बनता है।
  • माँ के लिए लाभ : आत्मविश्वास में वृद्धि, बेहतर मातृ-शिशु संबंध, सशक्तिकरण, स्तन दूध के उत्पादन में वृद्धि, अस्पताल से शीघ्र छुट्टी, तनाव में कमी तथा प्रसवोत्तर अवसाद के जोखिम में कमी आती है।
  • नवजात एवं बचपन में दीर्घकालिक लाभ : मस्तिष्क के विकास में सुधार, बुद्धिमत्ता में वृद्धि, बेहतर कार्यकारी क्षमता, शारीरिक संगठन, कम तनाव तथा अभिभावक-शिशु संबंधों में मजबूती देखने को मिलती है।

के.एम.सी. प्रदान करनेवाले के लिए तैयारी:-

परिवार के सदस्य जैसे पिता, दादा, या चाची के.एम.सी. प्रदान कर सकते हैं, और सबसे अच्छा के.एम.सी. प्रदाता मां है।

  • के.एम.सी. (कंगारू मदर केयर) प्रदान करने वाला व्यक्ति इसके लिए इच्छुक तथा स्वस्थ होना चाहिए।
  • के.एम.सी. प्रदान करने वाले को हाथ धोने, प्रतिदिन स्नान करने, नाखून काटने, बालों को बाँधकर रखने तथा स्वच्छ कपड़े पहनने जैसी व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करना चाहिए।
  • आभूषण, घड़ियाँ तथा पवित्र धागे हटा देने चाहिए, क्योंकि ये स्वच्छता बनाए रखने में बाधा बन सकते हैं और नवजात शिशु को चोट पहुँचा सकते हैं।
  • के.एम.सी. प्रदाता को सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य सामने से खुली तथा ढीली पोशाक पहननी चाहिए।
  • माँ को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वह शिशु को दिन और रात में यथासंभव अधिक समय तक के.एम.सी. स्थिति में रखे।
Duration of KMC
Duration of KMC

के.एम.सी. को कैसे प्रदान करें ?

  • बच्चे को डायपर, टोपी और मोजे पहनाकर के.एम.सी. (कंगारू मदर केयर) बैग में रखें।
  • ठंड के मौसम में बच्चे को ऊनी टोपी, ऊनी दस्ताने तथा ऊनी मोजे पहनाकर के.एम.सी. बैग में रखें।
  • माँ के स्तनों के बीच की त्वचा को बच्चे की त्वचा के सीधे संपर्क में रखें ताकि त्वचा से त्वचा का संपर्क बना रहे।
  • यह सुनिश्चित करें कि बच्चे का सिर ऊँचा रहे, ताकि दूध फेफड़ों में न जाए। माँ को लगभग 45 डिग्री के कोण पर आराम करना या सोना चाहिए।
  • बच्चे के सिर को एक तरफ रखें। इससे श्वास मार्ग खुला रहता है तथा माँ और बच्चे के बीच आँखों का संपर्क बनाए रखने में सहायता मिलती है।
  • बच्चे के कूल्हों को मेंढक (Frog Position) की स्थिति में तथा बाँहों को मुड़ी हुई अवस्था में रखना चाहिए।
  • बच्चे का पेट माँ के पेट के स्तर पर होना चाहिए।
  • बच्चे को तब तक स्नान न कराएँ जब तक उसका वजन 2500 ग्राम तक न पहुँच जाए।
  • बच्चे को बार-बार गोद में लेने या अनावश्यक रूप से संभालने से बचें।
  • बच्चे को बोतल से दूध न पिलाएँ।
  • बच्चे को बीमार व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचाएँ।

के.एम.सी. के दौरान क्या नहीं करना चाहिए

  • शिशु को तब तक न नहलाएँ जब तक उसका वजन 2,500 ग्राम न हो जाए।
  • आवश्यकता होने पर शिशु को गुनगुने पानी से साफ कपड़े द्वारा पोंछा जा सकता है।
  • शिशु को बार-बार कंगारू मदर केयर (के.एम.सी.) स्थिति से बाहर न निकालें।
  • शिशु को बोतल से दूध न दें।
  • शिशु को बीमार व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचाएँ।

के.एम.सी. को कब बंद किया जाना चाहिए?

अक्सर एक शिशु को कंगारू मदर केयर से निकाल लिया जाता है जब गर्भकाल समाप्त हो या वजन लगभग 2,500 ग्राम हो। इस समय तक शिशु यह दिखाना शुरू कर देता है कि वह असहज है या नहीं, तब शिशु कंगारू परिधान से अंगों को बाहरनिकालता है और रोता है जब माँ शिशु को त्वचा से त्वचा के संपर्क में लाने की कोशिश करती है। यह के.एम.सी. से शिशु को छुड़ाने का समय है।